भोजपुरी साहित्य के इतिहास के क्रमिक आ किस्तवार जानकारी रउरा सभन ला प्रस्तुत बा:
हर साहित्य के एगो सतत परम्परा होला.उ साहित्य के समझे ला आ अध्ययन में सुविधा खातिर ओकर काल विभाजन आ नामकरण के परंपरा बा.
*महाराजा कुमार दुर्गा शंकर प्रसाद सिंह 'नाथ' के अनुसार :-
१.प्रारंभिक अविकसित काल (सिद्ध काल) - सन ७०० से ११०० ई.;
२.आदि काल (ज्ञान प्रचार काल - वीर काल ) - सन ११००-१३२५ ई.;
३.पूर्व-मध्यकाल (भक्तिकाल)- सन १३२५-१६५०ई.;
४. उत्तर मध्यकाल (रीति काल) - सन १६५०-१९०० ई.;
५. आधुनिक काल भा राष्ट्रीय काल आ विकास कल - सन १९,०० -१,९५० ई.;
* डॉ. कृष्ण देव उपाध्याय अपना "भोजपुरी भाषा और साहित्य" (१९५४) में भोजपुरी के नामकरण भर कएले बानी १. सिद्ध साहित्य
२.नाथ साहित्य
३.संत साहित्य
४.लोक साहित्य
५. आधुनिक साहित्य
* रास बिहारी पाण्डेय जी अपना "भोजपुरी भाषा क इतिहास" में ई तरीका से काल बिभाजन कएले बानी
१. आरंभिक काल सन ७००-१,१००
२.चारण काल सन ११००-१४००
३.संत काल सन १४००-१८००
४. अध्ययन कल सन-१८००-१९००
५. वर्तमान कल सन १९००- से अब तक यानि की सन १९८० तक
*डॉ. तैअब हुसैन पीड़ित के किताब "भोजपुरी साहित्य के रुपरेखा के अनुसार-
१.प्रारंभिक काल सन ७००-१,१००
२.चारण काल सन ११००-१४००
३.संत काल सन १४००-१८००
४.अध्ययन काल सन-१८००-१९००
५.वर्तमान कल सन १९००- से अब तक यानि की सन २००५ तक
*पंडित गणेश चौबे के अनुसार-
१. संत साहित्य
२.प्रकीर्ण लोककाव्य
३. लोकसाहित्य आ
४.आधुनिक साहित्य
* डॉ. राजेश्वरी शांडिल्य के 'शिष्ट काव्य की रेखा के अनुसार
१.प्रारंभिक काल सन १८५०-१९००
२. चेतना कल सन १९००-१९४७
३. उत्कर्ष कल सन १९४७ से आगे
(साभार " भोजपुरी साहित्य के संक्षिप्त इतिहास " लेखक : नागेन्द्र प्रसाद सिंह, 'भोजपुरी साहित्य के संक्षिप्त' रुपरेखा :लेखक डॉ. तैअब हुसैन पीड़ित आ "भोजपुरी भाषा क इतिहास" लेखक रास बिहारी पाण्डेय )
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