आदरणीय भोजपुरिया भाई और बहिन
सादर प्रणाम
उपरोक्त विषय के ऊपर राउर निगाह ले जाये के पीछे हमार का मकसद बा उ बतावे के चाहतानी.
भोजपुरी भासा के क्षेत्रीय पहचान के साथै साथै अंतरराष्ट्रीय पहचान भी बा.
भारत के बिहार, उतर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ औरी झारखण्ड में एकर बोलानिहर, लिखनिहार और पढ़निहार के संख्या करोड़ में बा. उहे दिल्ली, मुंबई, कोलकता, लखनउ,पुणे, जालंधर, सूरत गुडगाँव, जयपुर, और नोर्थ इस्ट में गौहाटी, डिब्रूगढ़ और तीनसुखिया आदि जगहे लाखन में बा.
जहाँ तकले बात बा, अंतरराष्ट्रीय पहचान के बात बा त मारिसस,त्रिदिनाद, सूरीनाम, होलैंड, जमैका, टुबैगो,फिजी, गुनाया, औरी छोट छोट द्विपन जैसे बाली, सुमात्रा औरी वेस्ट इंडियन द्विपन में गइल गिरमिटिया मजदूरन से फैलल आ ससक्त भइल ई भासा के भारत सरकार संबिधान के आठवी अनुसूची में काहे नइखे सामिल करत????
भोजपुरी आन्दोलन से जुडल सब संस्था आपन आपन डपली बजावे में काहे लागल बाड़े ???????
साझा प्रयास काहे ना ???????
आन्दोलन से जुडल सब संस्था क्षेत्रवाद, जातिवाद आउर व्यक्तिवाद से कहे ग्रसित बा ??????
कुछेक संस्था के छोड़ के बाकि संस्था में नेतागिरी जादा कहे बा??????
साहित्य के सृजन करे वाला के ना सरकार ना कोनो संस्था मदद कहे नइखे करत??????
१०-२० लाख रूपया खर्चा संस्था नाच गाना पर खर्चा कर सकेले बाकिर कोनो भोजपुरी साहित्यकार के १० हज़ार के मदद भी ना कहे?????
सवाल कई गो बा ?????
लेकिन हम बरी बरी से राउर विचार चाहेब.
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