पलायन
बाढ़, सुखाढ़ आ रोटी
अजीब रिश्ता बा इनके
जवन खरका देलख
खरई खरई
जीये के विश्वास
साथे रहे के आस
धकेल देलस/ दउरत रेल के डिब्बा में
जहवां न बइठे क जगहे
न साँस लेवे के साँस
ऊँघत/ जागत / दू दू रत के
आँखिन में काटत
जहवां कोई नइखे आपन
बा त एगो टूटल सपना
सहारा बा
उहो बालू के भीत नियन
गरीबी के तराजू में
एक ओरी भूख
दुसर ओरी निराशा
बिच में दू गो लइकन के
सुसकत आँख
दूध क तरसत ओठ
बुढ माई बाबु
अ अदद बीबी
उहो टी. बी. के शिकार
बीमार/लाचार/जियल दुश्वार
त
इ जिनिगी के भीरी
पलायन के अलावा
कवन चारा बा ?
Sunday, June 27, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment