Thursday, June 17, 2010

"नाक बांचल त लाख मिलल

नाक ऊँचे राखीं, देखीं कहीं नाक कट न जाये, नाक के बाल भईल, नाक में दम कईल, न जानी केतना दर्जन मुहाबरा नाक पर लिखील होखी. देश रहो कि ओकर नाक काटो, एकर फिकिर केकरा बा ? देश के नाक उचें राखे खातिर नेता लोग विदेश जालन. जेतने घूमें लें ओतने देश के नाम उचं होत रहेला. ई त बिरोधी दल वाला लोग के स्वारथ ह जे विदेश घुम्वैया नेता लोग के घुम्क्कर कह के उनका धोती प पांकी डालेलन. ई त ध्य्नाबाद बा मिडिया वालन के जे नेता जी लोगन के फोकस में रख के उनकर धुतुन्गा बजावत रहेला लोग. फैदो बा, कबो कबो मिडिया वालन भाई लोग नेता जी के संगे संगे विदेश भ्रमण के मोका पा जालें.आपन नाक बांचल रहे, ऐ खेल में हमनी के राजनेता लोग उ माहिर बा लोग कि ओही लोग के बुद्धि के आगू चाणक्य जी रहते त फिसड्डी हो जईते. देश के नाक उंच रहे एकरा ला अमेरिका के आगू नाक रगडला के में कवनो नोकसान थोड़े बा.
वामपंथी भाई लोग के ई बुझाते नइखे, ना ठाकरे लोग के, ना ममता दीदी के, न नक्श्ली लोगन के.
नाक कटी त प्लास्टिक सर्जरी करा लिहल जाई, तबे नु लोग गावत फिरत बा " उंच नाक वाला तोहरे बोलबाला"
भगवन माफ़ करस ओह आतंकवादियाँ के जे अपना करतूत से जरदारी साहेब के नाक कटवा रहल बा लोग. बेचारा के एगो नाक बा, कबो अमेरिका काटत बा त कबो लन्दन अब चिताम्बरम साहेब कटे में लागल बाड़े. ए कवि के कहनाम बा कि :" जनता खड़ी बाजार में, नाक नाक चिल्लाय, नेता बिनु चिंता करस, नाक रहो कि जाये"
पिछला एकाध साल में अताम्घती हमलावर लोग नाक में दम क देलन, कबो लन्दन, कबो काबुल, कबो इस्लामाबाद, कबो लाहोर, कबो क्रिकेट ग्राउंड, कबो मुंबई के ताज होटल, कबो दिल्ली के सरोजिनी नगर, कबो कनात प्लेस में हमला कर के सरकार के नाक में दम कर देले बा लोग . कबो संसद पर हमला कर के सर्कार के नाक कट देलख लोग.धार्मिक औरी ट्रेन में हमला के आपन नाक उंच कईल लोग.
आज कल नक्सलवादी लोग आपन नाक के लड़ाई लदत बा लोग. उन्हें जन मॉल के सुरक्षा में सरकार आपन नाक बचावे में लागल बिया.देतेवाडा में सेना के गाड़ी उड़ा के, पश्चिम बंगाल में ट्रेन उड़ा के नक्सलवादी लोग सरकार के नाक चापुट कर देले. लेकिन हमनी के बहादुर सेना लोग उ नक्सलीयन के नको चना चबवा रहल बड़े.
नाक कटे और काटे के बखान भी हमनी के शास्त्र, कथा,कहानी में बा. भगवन! हमारा दू चार गो नाक दिहल जाईत त बड़ बढ़िया रहित .एगो कटित त एगो त बचित.उहे लेके हम नाक वाला त कहईती आ गावत फिरती " नाक बांचल त लाख मिलल."
लेखक : संतोष पटेल
संपादक: भोजपुरी जिनिगी.
राष्ट्रीय प्रचार मंत्री: अखिल भारतीय भोजपुरी भासा सम्मलेन, पटना.
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