Tuesday, October 22, 2013
रामचंद्र राही के भोजपुरी कविता "कइसे रात बिताई जी"
जाड़ा लागत बाटे
कइसे रात बिताई जी
केकर अंगनवा में
आगि तापे जाई जी।
झोपडी त टूटल बाटे
एको नइखे टाटी
खटिया पुआर नईखे
खाली बाटे पाटी
बहे पुरवैया त
दांत किटकिटाई जी।
ओसवा के बूंदवा
देहिया कांपवे जी
दूजे शीतलहरी
मउगत के बुलावे
गुदरी से गोड़ तोपी
कइसे माथ लूकाई जी।
फटही बा धोती कुरता
सुईटर ना रजाई
धनिया मोर नईहर बाड़ी
घरवा नइखे माई
दियरी में तेल नइखे
कइसे बतिहर जलाई जी।
पटवा के अगिया
सहल नाही जाला
अँखियाँ से लोर बहे
करेजवा दुखाला
एको दाना अन्न नइखे
कइसे भूख मिटाई जी।
(साभार :तूरीं ई जंजीर (भोजपुरी लोकगीत संग्रह ) रचनाकार : रामचंद्र राही)
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