Wednesday, October 23, 2013
महामाया प्रसाद विनोद के एगो भोजपुरी कविता " जिनिगी का ह"
महामाया प्रसाद विनोद के एगो भोजपुरी कविता " जिनिगी का ह"
रोअत रात
मुस्कात भोर
पसेना से तर -तर
जेठ के दुपहर।
जिनगी का ह?
मेहनत- मजदूरी करत
टूसीआइल बचपन
खिलाल जवानी
मुरझाइल बुढ़ापा ह।
(महामाया प्रसाद विंडो के भोजपुरी कविता संग्रह " हार गईल बसंत")
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