Wednesday, October 23, 2013

डॉ अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा अखिलेश के एगो भोजपुरी कविता " कवन परी ?"

डॉ अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा अखिलेश के एगो भोजपुरी कविता " कवन परी ?" कवन परी उतर गईल रंग में नहा के रूप के तलईया में डुबकी लगा के। चन्दन तन -चम्पई नेह के घरौंदा मनिहारिन लौट गईल रेत के बना के। पाहून गुलाब परदेशी गवरईया भाग गईल आज, कहीं डीठना लगा के। देह के मडईया में, आकुल मन मैना फुदुक फुदुक राह खोजे घेंट उचका के। कवन परी उतर गईल रंग में नहा के रूप के तलईया में डुबकी लगा के। (भोजपुरी कविता संग्रह :चंपा के फुल से साभार)

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