Wednesday, February 2, 2011

डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना के व्यंग आलेख "दोआह"

शब्द शब्द के मोल समय के संगे घटेला भा बढेला. एगो उहो दिन रहे जब केहू के दोआह कह दी त बुझीं कि उ मुंह भमहोर ली बाकिर आजू उ दीं आइल कि जवन क्रेज दोआह के बा उ कुंवर के कहाँ? बड़का बड़का कुंवार लइका लोग दोआह के आगू झाल बजावत बाड़े बाकिर थाह ना लागल कि आखिर कवन हवा बहल बा कि सब कुंवारिन दोआहे पर लुभाइल बाडी . अब दोआह कहला पर केहू कोहनात नईखे बलुक मने मने हुलास के लड्डू फोरत बा . जब से फिलिम में कुंवारी लोग दोआह पर मोहाइल बा, लागत बा कि ई शब्दवे सेलिब्रेटी हो गइल बा . लागत बा कि दोआह अब खोजलो से ना मिलिहें आ मिलिहें त कइसे ?

करीना कपूर मोहाइल बाड़ी त सैफ अली खान पर, उहो दोआह, श्री देवी आपन जान लुटवली त बोनी कपूर पर उहो दोआह ..... किरण राव के आमिर कहाँ भेंटइले उहो दोआह, एगो आ दू गो होखे तब नू ईहाँ त दोआह के लाइने लागल बा. हेमाजी के धरमेंदर भेटइले त उहो दोआह आ करिश्मा कपूर जी के पूछबे मत करीं उन्कारो भाग में दोआहे दूल्हा लिखल रहलें. अब ई कुल्ही के , का रहस्य बा ई त केहू लाल बुझककड ही बताई बाकिर सब किछु मिला जुला के, हिला डोला के कहल जा सकत बा कि अब दोआहे के दीं बहुरे वाला बा. ई खे में हमरा अब तनको अजुर नइखे कि हमहूँ दोआहे बानी. अब देखे के बा कि कब ले केहू हमरा पर मरे मिटे आवत बा ओइसे हम टी.वी. आ अख़बार में विज्ञापन दे देले बानी कि हम बिना दहेज के बिआह में विश्वास राखी ला किनहूं के छव गो आ आठ गो बाडी के पेक्स होई हमरा दस गो बाडी पेक्स बा. एह सब गुण का साथे हम देहरादून में रहत बानी जेकरा हमरा पर मेहरबान होखे के बात हो जाये काहे कि एकर कवनो ठेकान नईखे कि कब सरकार

दोआह के बियाह पर रोक लगा दी. ई केहू नईखे जानत काहे कि कई गो नेता आ मंत्री दोआह बाड़े पहिले ओह

लोगिन के भाग फ़रिया जाई तब नू हमार नंबर आई. नंबर त अईबे करी हमरा पूरा विश्वास आ भरोसा बा. ई भरोसा काहे न रही जब सउंसे देशवे भगवन भरोसा पर बा त हमनी दोआह काहे ना रहब, बुझनी नू. आ न

बूझनी त बुझी कि राजनीतियो दोआह होले आ राजनेता भी. जवन नेता दू गो पति में घूम लिहले त का उ दोआह ना भइले ? एह बेरा देखि त दोआहे के भाव बा कुंवर लोग त गजरा मुरई भइल बा बाकिर सेंसेक्स उंच बा त दोआहे के

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