"भोजपुरी के आधुनिक भाषा शास्त्र (भाषा विज्ञानं)" के लेखक हिंदी आ भोजपुरी के विख्यात भाषा शास्त्री, विद्वान डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह जी बानी. असल में ई किताब प्रो. प्रसाद के किताब ' भोजपुरी के भाषाशास्त्र के परिवर्धित रूप ह. भोजपुरी भाषा शास्त्र पर अधिकांश काम अंग्रेजी आ हिंदी में भइल बा. डॉ. ग्रियर्सन, सुनीति कुमार चटर्जी, उदयनारायण तिवारी, रामदेव त्रिपाठी, रामबख्श मिश्र आदि के कम एही दुनो भसन में में बा. राजेंद्र प्रसाद सिंह के भी मूल कम हिंदी में भइल बा बाकिर जीतेन्द्र वर्मा के प्रयास से ई भोजपुरी में भी आइल.
किताब के सम्पादकीय भोजपुरी भाषा के मानकीकरण पर केन्द्रित बा. भोजपुरी हिंदी के नीचका बा आ हर भाषा के स्वरुप बदलत रहेला. खाँटी भाषा के नाव पर स्वाभाविक रूप से भाषा में होत परिवर्तन के रोकाला से भाषा के विकास बाधित होला. ' भाषा बहत नीर ह' एह में बदलाव के कई गो कारन होला जैसे सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक कारक होला.
भोजपुरी बोली भर नईखे रह गइल. ई अब खाली गीत-गवनई के भाषा नईखे रह गइल. अब ई विचार आ शास्त्र के भाषा बन चुकल बिया.जल्दिये शासन-प्रशासन, ज्ञान-विज्ञानं आदि के भी भाषा बनी. अइसन स्तिथि में एकरा खातिर देवनागरी लिपि के कवनो, अक्षर, संयुक्ताक्षर भा मात्रा के छोडल ठीक ना होई. एह से अभिव्यक्ति में कठिनाई होई.
जवना चीज खातिर भोजपुरी में शब्द बा नि;संदेह ओकरा के अपनावे के चाहीं बाकिर हिंदी, अंग्रेजी आ अउरो कवनो भाषा के शब्दन के भोज्पुरियावे के फेर में ओकर वर्तनी बिगाडल ठीक नईखे.जरुरत पडला पर दोसर भाषा के शब्दन के बेहिचक अपनावे के चाहीं.एह से भोजपुरी समृद्ध होई. बंगला, मैथली ईहे कइले बा. एह से भोजपुरी के विकास होई. अंग्रेजी के समृधि के एगो बडहन वजह ईहो बा कि उ अपना जरुरत के मुताबिक कवनो भाषा के शब्दन के अपना लेले.
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बेहतरीन ब्लौग के शुरुआत खातिर ढेर सारा बधाई और शुभकामना !
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