भटकाव
अजबे भटकाव बा अदमी के
कहाँ ले जाई / काथी कमाई
केतना ठगी/ आ केतना ठगाई
बुझात नइखे/ निमना राहता सुझाते नइखे
छटपटी लागल बा ./ धन कमएला
धनिक बन जाय ला / बेचैनी बा सरग में सीढ़ी
लगावे के / चान से आगू जाये के
बाकिर साल भर के रास्ता से भारी ह
छव महिना के राह / काहे कि
ई होला अथाह / एमे होला भटकाव
भुलाए के डर रहेला / ई पुरनिया लोग कहेला
घरो के गहना / हो जाला लहना
जवन बटोरले ना बटोराला
टूटत छितराइल सपना नियर
त आई / भटकाव से बांची
साँच के खेती में / पसेना गारी
हिम्मत मत हरी / लागल रही ई /
राजा जी / भटकाव से बांची
अटकाव से बांची / आ साँच में रही
भले दुःख सहिं / घबराई मत
अगराई मत / मन भटकाई मत
भाग एक ना एक दिन / गजबे करी
आ राउरो हाथे / उगत किरिन लगबे करी
संतोष पटेल (प्रमाणित बा कि हमर रचना बा जवन हमार भोजपुरी काव्य संग्रह : "नयकी भोजपुरी कविता" में संग्रिहत बा )
Tuesday, December 21, 2010
Subscribe to:
Comments (Atom)
